बुधवार, 14 जुलाई 2010

कि ये गूंगी सदी होने न पाये

साखी के पहले अंक में आगरा के युवा कवि और शायर संजीव गौतम की गज़लों पर खुलकर बातचीत हुई। अनेक सहित्यप्रेमियों, कवियों,शायरों और उर्दू साहित्य के पारखियों ने जहाँ संजीव के तेवर की तारीफ की, वहीं उनकी गज़लों के बहाने गज़ल के व्याकरण पर भी चर्चा हुई। 
विस्तार से देखें साखी पर 

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