शुक्रवार, 27 अगस्त 2010

दिल्ली का यह ‘सुपर सिपाही'

वीरेन्द्र सेंगर की कलम से कांग्रेस का बहुरूपियापन गजब का है। इसके रणनीतिकारों ने भले बाकायदा ‘पटकथा’ न लिखी हो लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने लोक लुभावन राजनीतिक ‘सोप-आपरा’ दिखाने में महारत हासिल कर ली है। जिसमें भरपूर रोमांच है। भावुकता है। गरीबों और आदिवासियों के लिए ममता भरी झप्पी भी है। एक तरफ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह देश में कारपोरेट कल्चर बढ़ाने में लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ ‘युवराज’ राहुल गांधी का दिल दलितों और आदिवासियों के लिए जब-तब जोर-जोर से धड़कने लगता है। अपनी बात कहने का उनका अंदाज भी इतना सूफियाना होता है कि ‘जादू’ कईगुना हो जाता है। ऐसा ही करिश्मा दिखा, उनके उड़ीसा दौरे में। वे गुरुवार को कालाहांडी इलाके के नियमागिरी हिल्स में पहुंचे थे। यहां लांजीगढ़ में उनकी एक बड़ी रैली हुई। महज नौ मिनट के भाषण में उन्होंने आदिवासियों का दिल जीतने की पूरी कोशिश कर डाली। एकदम, आदिवासी मसीहा वाला निरपेक्ष अंदाज। बोले, आपने अपनी धरती बचा ली। आपने, संघर्ष करके अपने भगवान को बचा लिया। इसी की बधाई देने दिल्ली से आया हूं।

हल्की-हल्की दाढ़ी। कुछ-कुछ तुड़ा-मुड़ा झकाझक सफेद कुर्ता-पायजामा। छोटे-छोटे वाक्यों में बात कहने का सहज अंदाज। टीवी न्यूज चैनलों ने देश-दुनिया को उनके इस अंदाज-ए बयां की पूरी लाइव कवरेज दिखाई। यह भी देखने को मिला कि कैसे हजारों-हजार आदिवासी ‘युवराज’ को देखकर ही मदमस्त होते रहे। राहुल ने कहा भी,‘ मैं दिल्ली में आपका सिपाही हूं... आपकी एक आवाज पर कहीं से आपके पास हाजिर हो जाऊंगा|’ वे बताते गए कि कैसे अपने वायदे के पक्के हैं। कह दिया 2004 में यह वायदा करके गया था कि इस बार दिल्ली में गरीबों और आदिवासियों की सुध लेने वाली सरकार आएगी। आ भी गई। उन्हें बताया गया था कि नियमागिरी पहाड़ को वे लोग अपना भगवान मानते हैं। जबकि, राज्य सरकार इसमें खनन के लिए आमादा है। आपकी आवाज दिल्ली ने सुनी। आपकी धरती और भगवान दोनों सुरक्षित हो गए।

मंगलवार को ही केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने फरमान सुनाया था कि ब्रिटेन की कंपनी वेदांत को नियमागिरी हिल्स में खनन नहीं करने दिया जाएगा। दरअसल, हाल में पर्यावरण मंत्रालय की एक चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने वेदांत के बाक्साइट खनन को खतरनाक करार किया था। इस प्रोजेक्ट को बंद कराने की सिफारिश की थी। जबकि, वेदांत औद्योगिक घराना उड़ीसा में रिफाइनरी और पावर सेक्टर में ही करीब एक लाख करोड़ रुपये निवेश करने का एलान कर चुका है। राहुल गांधी की रैली जिस स्थान पर हुई थी, वहां से महज दो किलोमीटर दूर ही वेदांत अल्युमीनियम लिमिटेड अपनी एक रिफाइनरी तैयार कर रहा है। वेदांत की ही  तरह इस्पात निर्माण की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी ‘पास्को’ के भविष्य पर आशंका के बादल गहरा गए हैं। दक्षिण कोरिया की यह कंपनी कालाहांडी क्षेत्र में एक इस्पात की बड़ी परियोजना लगा रही है। केंद्रीय वन और आदिवासी मामलों के मंत्रालयों ने इस पर आपत्ति की है। मुख्यमंत्री नवीन  पटनायक का कहना है कि राजनीतिक कारणों से केंद्र सरकार राज्य की बड़ी निवेश परियोजनाओं में बाधा डाल रही है। जबकि, सालों की मेहनत के बाद उन्होंने इन घरानों को इस पिछड़े राज्य में निवेश करने के लिए तैयार किया था|

उडीसा में  दशकों से कांग्रेस सत्ता से वंचित है। जमीनी राजनीति में पटनायक का सिक्का चलता है। पहले बीजेडी एवं भाजपा के गठबंधन के चलते कांग्रेस यहां मुंह की खाती रही। लेकिन, पिछले लोकसभा के चुनाव में पटनायक ने भाजपा से गठबंधन तोड़ दिया था। उसने अकेले ही कांग्रेस का मुकाबला कर डाला। इसके बाद भी जीत हासिल कर ली। कांग्रेस को यही कसक है। वह किसी तरह इस अति पिछडे राज्य को अपनी राजनीतिक झोली में डालने को बेचैन है। राहुल गांधी नियमागिरी हिल्स इलाके में दो साल पहले भी आए थे। उस समय भी उन्होंने वेदांत की खनन परियोजना के विरोध में अपना झंडा फहराया था। इस बार तो वे इसका ‘श्रेय’ लूटने आए थे। सो, जमकर इसे लूटा भी। कांग्रेस के रणनीतिकार जानते हैं कि देश की जतना बहुत भावुक मिजाज है। वह इस बात से ही गदगद हो सकती है कि नेहरू-गांधी परिवार का वारिस गरीबों की आवाज को अपना ‘धर्म’ करार करता है।

3 टिप्‍पणियां:

  1. जनाब,
    राजनीती में कोई किसी की आवाज नहीं होता,
    सब अपना फायदा देखते है
    http://oshotheone.blogspot.com/

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  2. जब तक ये सब वोटों में न बदले तो फ़ायदा क्या :(

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