शनिवार, 3 अप्रैल 2010

उन दरिंदों का डर है

डा. उमा शंकर तिवारी मेरे शिक्षक रहे और मेरे काव्यगुरू भी. उनकी शख्सियत   में लबालब प्यार था, सागर की लहरों की तरह डुबो लेने वाली सरगर्मी थी तो उनकी बातों में अपना बनाये रखने की अजीब सी ताकत. वे चाहे कितने ही साल  बाद मिलें, उनके पास होते ही लगता था जैसे कोई अन्तराल ही नहीं रहा. पिछले बरस वे नहीं रहे मगर वे    उन लाखों दिलों में हमेशा बने रहेंगे, जिन्होंने उनके गीत सुने हैं, जिन्होंने उनके साथ कुछ लम्हे बिताये हैं. और मैं तो तकदीर वाला हूँ की मुझे कई वर्ष उनके साथ, उनके पास रहने का मौका मिला, उन्हें सुनने और उन्हें सुनाने का मौका मिला, उनके साथ सफ़र करने का मौका मिला. जलते शहर में, धूप कड़ी है और तोहफे कांच घर के, इन तीन गीत संकलनों में उनका समर्थ कवि देखा जा सकता है.  वे एक प्रयोगधर्मा नवगीतकार के रूप में हिंदी जगत में निरंतर छाये रहेंगे. उनके दो गीत   यहाँ पेश हैं....

१.
क्या मिलें, किससे मिलें
मिलकर भी जो मिलते नहीं
आदमी लायें कहाँ से
डाल पर खिलते नहीं.....

हाथ में चेहरे कई
लेकर निकलते लोग हैं
सिर्फ मतलब के लिए
कंधे बदलते लोग हैं
क्या बढ़ाएं हाथ हम 
वो हाथ तो हिलते नहीं....

सांप वाले खेल में गर
सीढियाँ पा जायेंगे
सांप को अंधा करेंगे
दूध भी पी जायेंगे
क्या सिलेंगे जख्म अपने
होंठ तो सिलते नहीं

बाल गर्दन पर उगाये
भीड़ पर गुर्रायेंगे
क्या पता अगली सदी तक
क्या से क्या हो जायेंगे
कौन झेलेगा इन्हें
कटते नहीं, छिलते नहीं.

२.
किधर से चले
कारवां  जिंदगी का
कि उस मोड़ पर आज
हम आ गए हैं .....

कहीं दूर मंजिल,
समय मुख़्तसर है
कदम दर कदम
एक अंधा सफ़र है
अजब खौफ के
सिलसिले बढ़ गए हैं
किसी रौशनी की न
हमको खबर है
हमें आज भी उन
दरिंदों का डर है
जो हम पर हजारों
कहर ढा गए हैं.....

मुसाफिर हैं यूँ तो
बहुत काफिले में
मगर  एक दीवार सी
खिंच गयी है
कई बार नफरत
भरी  रंजिशों  में
भृकुटियाँ तनी
मुट्ठियाँ भिंच गयी हैं
इसी एक अपनी
कमी की बदौलत
मुहब्बत भरी
हस्तियाँ पिस गयी हैं
इसी एक गफलत में
बेदर्द धोखे
हमेशा अकेला
हमें पा गए हैं......

मगर ये भी तय है
ये कुहरे छंटेंगे
जहाँ रात बीती
सवेरा तो होगा
किन्हीं ओस भींगी   
हुई फुनगियों पर
परिंदों का आखिर
बसेरा तो होगा
उजाले का रंगीन
ख़त बांटता सा
कहीं डाकिया
हाथ तेरा तो होगा
महज उस सुबह के
लिए हम जियेंगे
यक़ीनन उजाले
जो रास आ गए हैं.

(दोनों  नवगीत संकलन तोहफे कांच घर के से )


  

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