गुरुवार, 4 मार्च 2010

आरम्भ

आरम्भ ही मुश्किल काम होता है। कई बार लोग सोचते रह जाते हैं और आरम्भ नहीं कर पाते हैं। वैसे तो सोचना भी आजकल नितांत दुष्कर हो गया है। बहुत सारे लोग तो सोचने तक भी नहीं पहुँच पाते हैं। क्यों? कभी सोचिये तो लगेगा की आदमी का सर वक्त के हथौड़े के नीचे इस तरह पड़ा हुआ है कि वह हर क्षण इस भय में डूबा रहता है कि पता नहीं कब उसके ऊपर प्रहार हो जाये। यह कठिन परिस्थिति है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वह वर्तमान की जगह भूत और भविष्य के बारे में ज्यादा चिंतित रहता है। इस चिंतन से उसे मिलता कुछ नहीं है परन्तु भूत कि उपलब्धियां और भविष्य के सपने उसके चेतन मन को इस तरह घेर लेते हैं कि वर्तमान के साथ यात्रा में वह पीछे छूटने लगता है। वर्तमान में बने रहकर ही हम अपनी कठिनाइयों से मुक्त हो सकते हैं। जब अर्जुन को रणक्षेत्र में भ्रम हुआ था तब कृष्ण ने उन्हें यही बताया था। कृष्ण ने अर्जुन से कहा..मामनुस्मर युद्ध च। आशय यह की मुझे याद रखो और युद्ध करो। यही कर्म का पथ है, यही वर्तमान में बने रहने का रास्ता है। अगर आप ऐसा कर पते हैं तो आप किसी भी नए आरम्भ के लिए तैयार हैं। पर इससे भी खास है आरम्भ करके लक्ष्य तक पहुंचना। यह तभी संभव है जब लक्ष्य स्पष्ट हो और उस तक पहुंचने का दृढ़ संकल्प हो। यही जीवन की सच्ची उपलब्धि है। यही वर्तमान में बने रहना है। मेरी अपनी पंक्तियाँ हैं जो वर्तमान को और स्पष्ट करती हैं...
फूल के खिलने और मुरझाने की
संधि पर खड़ा रहता है समय
पूरी तरह खिला हुआ
एक फूल मुरझाता है और
समय दूसरी संधि पर
खिल उठता है.

4 टिप्‍पणियां:

  1. samay apne aap me bahut takatvar hota hai. samay ke anusar hee jeevan ke sandarbh badal jate hen. aaj ka manav bhoot, bhavishya aur vartman ke bare men adhik chintit rahta hai. niskam karm se hee is mansikta se ubra ja sakta hai Dr Maharaj Singh Parihar

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  2. Ma|Achchi lagi,
    kynoki vo hoti hi achchi hai,
    Sachchi hai,
    Bachcha chahe chota ho ya bada
    Vo uske hirday ka tukda hai,
    Uska ansh hai,
    Uska vansh hai,
    Voh moh mamta ki murat hai
    Bachche ke roop mein
    dekhti bhagwan ki murat hai
    Dr.Rakesh Sharad

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  3. Really you are seaker after truth, truth that is infinite beyond the sky, truth that is greatest to the millions of cosmos, beautiful like a smile on the face of an infant.
    ....banshidhar Mishra

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  4. Really you are seaker after truth, truth that is infinite beyond the sky, truth that is greatest to the millions of cosmos, beautiful like a smile on the face of an infant.
    ....banshidhar Mishra

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