गुरुवार, 3 जून 2010

डा सुभाष राय की कवितायेँ पढ़ें

सृजनगाथा पर

अनुभूति  पर

 कृत्या पर

2 टिप्‍पणियां:

  1. आईये जाने ..... मन ही मंदिर है !

    आचार्य जी

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  2. सुभाष भाई सृजनगाथा में आपकी कविताएं पढ़ी । तीसरी कविता ने बेहद प्रभावित किया। शेष दो भी वहां ले जाती हैं जहां हम जाना चाहते हैं। पर्यावरवयण दिवस की संध्‍या पर इन कविताओं को पढ़ना सचमुच अच्‍छा लगा। सृजनगाथा के अप्रैल अंक में मेरी भी एक कविता है-सहजन का पेड़ । कभी देखियेगा।

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