शुक्रवार, 16 जुलाई 2010

हमका माफी दै दो, हमसे गलती ह्वै गयी

वीरेंद्र सेंगर की कलम से 
उत्तर प्रदेश में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अपने खास ‘वोट बैंक’ की राजनीतिक कवायद तेज कर दी है। ठीक उसी तरह जैसे कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुस्लिम वोट बैंक को बांधे रखने के लिए ‘बलिदानी’ तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। इन दोनों राज्यों में कांग्रेस नए सिरे से अपना जनाधार बढ़ाने में लगी है। उसकी खास उम्मीद मुस्लिम वोटों पर टिकी है। मुलायम यह अच्छी तरह समझ रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस वाकई में ‘सेहतमंद’ हुई तो इसकी सबसे ज्यादा कीमत उनकी पार्टी को ही चुकानी पड़ सकती है। उन्हें सबसे ज्यादा खतरा मुस्लिम वोट बैंक से हो गया है। मुसलमानों को रिझाने के लिये ही उन्होंने ‘माफीनामे’ का दांव चला है। उन्होंने मुसलमान भाइयों से सवा साल पीछे की गई ‘गलती’ के लिए माफी चाही है। ‘माफीनामे’ में सपा सुप्रीमो ने कहा है कि पिछले वर्ष लोकसभा के चुनाव में उन्होंने कुछ गलत तत्वों (कल्याण सिंह) का साथ ले लिया था। इससे आपको जो मानसिक कष्ट पहुंचा, उसका दुख है। माफ कर दो। आगे से ऐसी भूल नहीं होगी।

अनौपचारिक चर्चा में मुलायम ने ये संकेत भी दे दिए हैं कि कल्याण सिंह से ‘दोस्ती’ अमर सिंह के चक्कर में आकर हो गई थी। ये उनके जीवन की सबसे बड़ी राजनीतिक गलती हुई है। अब वे अल्पसंख्यकों के हितों के लिए ज्यादा जुझारू बन जाएंगे। आखिर सपा प्रमुख को अचानक इस माफीनामे की जरूरत क्या पड़ गई? इस सवाल पर पार्टी नेतृत्व यही कह रहा है कि गलती को स्वीकार (वह भी लिखकर) करना, बड़े दिल की निशानी है। पार्टी उम्मीद कर रही है कि इस माफीनामे से मुसलमानों के तमाम गिले-शिकवे दूर हो जाएंगे। लेकिन कांग्रेस नेतृत्व सपा के इस कदम को महज एक ‘शिगूफा’ मान रहा है। पार्टी के महासचिव दिग्विजय सिंह ने अनौपचारिक रूप से पार्टी कार्यकर्ताओं से यही कहा है कि दो लाइन के माफीनामे से ही जघन्य राजनीतिक ‘पाप’ नहीं धुला करते। कांग्रेस का जनाधार बढ़ते देखकर अभी कई और ‘माफीनामे’ आ सकते हैं। आम जनता काफी समझदार है। उसे एकदम नादान समझने की नादानी नहीं होनी चाहिए। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह सरकार में ‘राज्य मंत्री’ रहे डॉ. सीपी राय अब कांग्रेस में हैं। एक दौर में वे सपा प्रमुख के करीबी भी रहे हैं। उनका कहना है कि आखिर मुलायम सिंह किस-किस से माफी मांगेंगे? अभी वे कल्याण सिंह से दोस्ती के लिए मुसलमान भाइयों से माफी मांग रहे हैं। उन्हें बडे उद्योगपतियों का साथ देने के लिए किसानों से माफी मांगनी पड़ेगी। यहां तक कि उन्हें अपने परिवार के कुछ लोगों व बेहद करीबियों से माफी मांगनी पड़ेगी क्योंकि सरकार में रहते हुए उन्होंने इनके साथ भारी गैर इंसाफी की थी।

 चर्चा चली थी कि यह ‘कवायद’ विद्रोही नेता आजम खान को मनाने की कोशिश का एक हिस्सा हो सकती है। ये अटकलें चली ही थीं कि आजम खान ने खुद अपने ‘पत्ते’ खोल दिए। मुलायम के ‘माफीनामे’ की खबर आने के बाद रामपुर में उन्होंने जो प्रतिक्रिया दी, उससे यही लगा कि उनकी नाराजगी में कोई अंतर नहीं आया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि इतनी देर से आए ‘माफीनामे’ पर वे जरा इत्मिनान से गौर करेंगे। तब समझने की कोशिश करेंगे कि आखिर इसके पीछे उनकी मंशा क्या है? लंबे समय से चर्चा रही है कि कांग्रेस उन्हें अपने साथ जोड़कर यूपी में अपना ‘हाथ’ मजबूत करना चाहती है लेकिन कांग्रेस का एक तबका कह रहा है कि अक्खड़ आजम खान को पार्टी अनुशासन में बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।कांग्रेस के कई बड़े मुस्लिम नेता, आजम की ‘इंट्री’ नहीं चाहते।  कांग्रेस में आजम की ‘इंट्री’ को लेकर दुविधा का आलम है जबकि सपा नेतृत्व भी समझ नहीं पा रहा है कि आजम खान ‘माफीनामे’ के बाद भी लौटैंगे या नहीं? उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी 16 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है। एक दौर में कांग्रेस के लिए अल्पसंख्यक वोट बैंक सबसे भरोसे का था लेकिन पिछले दो दशकों से यहां कांग्रेस हासिए पर पहुंच गई है। मुस्लिम वोट बैंक भी सपा व बसपा के बीच बंटता रहा है। इस वोट बैंक की प्रबल दावेदार मायावती भी हैं। मुस्लिम, दलित व ब्राह्मण वोट बैंक के समीकरण से उन्होंने सबको शिकस्त दी थी। अब स्थितियां कुछ बदल रही हैं। लोकसभा चुनाव के  बाद कांग्रेस भी यहां ‘बड़ी’ खिलाड़ी हो गई है। दो वर्ष बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस, राहुल गांधी के नेतृत्व में इस चुनाव में अपने बूते पर सरकार बनाने का सपना देखने लगी है। यही है राहुल का ‘यूपी मिशन’।

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी सरकार की छवि ‘सेक्यूलर’ रखना चाहते हैं ताकि मुस्लिम वोटर एकदम दूर न भागे। इसीलिए उन्होंने धुर हिंदुत्ववादी छवि वाले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से ‘तकरार’ले ली है। राजद प्रमुख लालू यादव कहते हैं कि मुसलमान भाइयों को धोखे में रखने के लिए नीतीश यह राजनीतिक ड्रामा कर रहे हैं। कुछ इसी तरह की टिप्पणी पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने मुलायम को लेकर की है। उन्होंने माफीनामे को एक पाखंड बताया है। कहा है कि गलती तो उनसे हुई थी, जो मुलायम का साथ पकड़ा था। राजनीतिक ‘श्राप’ देने के अंदाज में वे बोले कि अब मुलायम पर न हिंदू विश्वास करेगा और न मुसलमान। वे कभी भी सत्ता में नहीं लौटेंगे। जबकि, मुलायम भरोसा जता रहे हैं कि अल्पसंख्यकों में उनकी इस उदार पहल का अच्छा संदेश जाएगा क्योंकि वे लोग जानते हैं कि मुलायम ही उनके हितों के लिए बड़ी से बड़ी ‘कुर्बानी’ देने का जज्बा रखते हैं।

2 टिप्‍पणियां:

  1. अरे ओ तुमे पता है साक्षात्कार.कॉम ने एक नया अभियान चालू किया है । तुम हमें चिपकाओ हम तुमे चिपकाओ ? भाई तुम गलत मत समझो । हम तो ब्लॉग - साईट को प्रेरित करने की बात कर रहे है । अब करना क्या है । आप हमारी साईट पर जाओ और साईट के राईट हैण्ड पर नीले कलर वाले लिखे साक्षात्कार .कॉम पर चटका लगाओ । अब आप सीधे tahelka.co.in पर चले जायेगे वहा से H TML कोड लेकर अपनी साईट पर चिपका दो और हमें अपना लिंक और कोड मेल कर दो । हम आपको चिपका देगे । ऐसे करके चिपका चिपकी का खेल करते रहो । चलो राम राम ।

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  2. आज बड़े भाई माननीय मुलायम सिंह को एक समुदाय विशेष से माफ़ी मागंते देख बड़ा कष्ट हुआ .सत्ता आते ही अहंकार कि पराकाष्ठा और जाने के बाद का यह स्वरुप कुछ ठीक नहीं लगा .भाई साहब किस किस से माफ़ी मांगेंगे ?सबसे पहले लोहिया कि आत्मा से जिनके जाति तोड़ो के विपरीत आप केवल जाति जाति ही खेलते रहे ,चौ चरण सिंह से जिनकी सादगी और किसानो के प्रति समर्पण से आप का दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं रहा ,राजनारायण और कर्पूरी ठाकुर सहित वे तमाम लोग जो जिदगी भर दूसरो के लिए संघर्ष करते रहे और आप केवल अपने और अपने परिवार के लिए या बहुत हुआ तों अपने गाँव के लिए या कुनबे के लिए,१९ प्रदेशो के उन लोगो से जिन्होंने समाजवादी पार्टी कि स्थापना किया था और परिवार के अयोग्य लोगो के कारण उनके सपने भी टूटे और पार्टी भी ,उन हजारो कार्यकर्ताओ से जिनके लिए आपके तथा पाती दफ्तर के दरवाजे सत्ता के दौरान बंद हो गए थे ,९५ प्रतिशत उन लोगो से जिन्हें ५ प्रतिशत लोगो के खिलाफ लड़ाई कि बात कर आपने साथ लिया था क्योकि आप तों ५ लोगो में जा बैठे ,तमाम गरीबो से जिनका आप सत्ता काल में मजाक उड़ाते रहे फ़िल्मी और पूंजीवादी चकाचौध के कारण ,उन तमाम लोगो से जो या तों आप के कारण बर्बाद हो गए या ख़तम ही हो गए ,रामपुर तिराहे के बलत्कार कि शिकार उन बहनों से ,नक़ल कर पास तों हो गए आप के स्वार्थ पूर्ण फैसले से लेकिन जिन्हें नौकरी नहीं मिल रही है उन बच्चो से ,राजवीर का आपके आगरा मंच पर ये कहना कि कल्याण और अलग जरूर थे पर ह़र काम आपस में बात कर ही करते थे यानि बाबरी मस्जिद में बात कि होगी इस विश्वासघात से दुखी लोगो से ,समाजवाद शब्द को दलालों के जूतों से रौदने के लिए सच्चे समाजवादियों से ,छोटे से बड़े दलालों के कारण जिन वफादार और समाजवादी आन्दोलन के सिपाहियों को अपमानित किया या निकाल ही दिया उनसे या अपने आस पास भी जिन तमाम लोगो को लगातार केवल धोखा ही देते रहे है उन सभी से ,भाई साहब किन किन से अभी और माफ़ी मांगने कि प्लानिंग है ?क्या कुछ बाकी रह गया है लोगो का अपमान और अपना फायदा .सियासत के लिए आप क्या क्या करेंगे भाई साहब आप के इस रूप कि कल्पना ही नहीं किया था इसलिए सचमुच बड़ा दुःख हो रहा है .पर आप अपने ह़र छल कपट और दाव में सफल हो इसकी शुभकामना .

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