सोमवार, 12 जुलाई 2010

जय हो पाल बाबा की

पाल बाबा, पाल द आक्टोपस, आक्टोपस पाल एलेन और इस तरह के अनेक नाम उसे मिल गये हैं। वह फुटबाल का मसीहा है। कुछ लोग तो उसे फुटबाल का क्राइस्ट कहने में संकोच नहीं कर रहे। दुनिया भर में उसके नाम के चर्चे हैं। जो आदमियों के बूते का काम नहींं, वह एक समुद्री जानवर ने कर दिखाया। दुनिया भर के ज्योतिषियों के लिए एक चुनौती है। अक्सर लोग ज्योतिष को झूठा कह देते हैं। कई बार उनकी भविष्यवाणियां गलत हो जाती हैं, इसलिए उन पर सौ प्रतिशत यकीन नहीं किया जा सकता। अक्सर दो-टूक भविष्यकथन करने में ज्योतिषी डरते भी हैं। कहीं उल्टे बांस बरेली वाली कहावत चरितार्थ न हो जाय। कुछ गड़बड़ हुई तो अंजाम भी भुगतना पड़ सकता है। इसलिए भविष्यवाणी करने के लिए काफी बुद्धिमत्ता की जरूरत होती है।
कुछ ऐसा कहना पड़ता है, जो अमूमन हर आदमी की जिंदगी में घट सकता है। कुछ बुरा होने वाला है तो भी सीधे वैसा कहना ठीक नहीं समझा जाता है। भविष्यवाणी को कुछ मीठी-मीठी बातों के साथ मिलाकर चूरन की तरह पेश करना पड़ता है। मसलन आप के भाग्य में बहुत धन का योग है, वह आता भी है, मगर टिकता नहीं। इसलिए हमेशा आप कठिनाइयों में बने रहते हैं। अथवा आप हमेशा दूसरों के भले की बात सोचते हैं, उनके लिए करते भी हैं, मगर जब आप की जरूरत पड़ती है तो बहुत कम लोग मदद के लिए आते हैं। पर पाल बाबा को इस तरह की बात पसंद नहीं। वे दो टूक बात करते हैं। जो होना है सिर्फ वही कहते हैं। चाहे कोई नाराज हो या खुश। उन्हें परवाह नहीं कि उनकी बात से किसी को मिर्ची लग जायेगी, कोई उनके खिलाफ प्रदर्शन करेगा, नारे लगायेगा, पुतला फूंकेगा। बुरी लगे तो लगे, पर सच तो सच ही है। पाल बाबा पर जर्मनी के लोग बहुत नाराज हुए। उनका कहना है कि जर्मनी की हार का कारण पाल बाबा हैं। पर स्पेन में पाल बाबा की जयजयकार हो रही है, उनके मसीहाई अंदाज पर लोग बेतरह फिदा हैं, उनके लिए कुर्बान होने को भी तैयार हैं। स्पेन के एक व्यापारी का तो दिल ही पाल बाबा पर आ गया है। उसने उन्हें खरीदने की इच्छा जतायी है। 38 हजार डालर की बोली भी लगा दी है। यह राशि भविष्य में और बढ़ सकती है।

अब तक ज्योतिष की वैज्ञानिकता पर ऊंगली उठाने वाले, उसे अवैज्ञानिक और अनुुमान मात्र करार देने वालों को कोई तर्क नहीं सूझ रहा है। वे मनुष्य रूपधारी ज्योतिषियों से पंगा लेने में तनिक नहीं घबराते थे पर एक पशु-ज्योतिर्विज्ञानी के हाथों उन््हें करारी मात मिली है, कड़ी चुनौती मिली है। टुटपुंजिये तर्कविज्ञानी मुंह छिपाये फिर रहे हैं। कैसे गलत ठहरायें पाल बाबा को। एक भी तो गलती नहीं की उन्होंने। जो कह दिया, पत्थर की लकीर बन गयी। बाबा बोला तो किसी की तकदीर फूट गयी और किसी की संवर गयी। सोचें तो एक तरह से पाल बाबा ने ज्योतिषियों का मान बढ़ाया है, ज्योतिष पर संदेह करने वालों को सच्चा और खरा जवाब दिया है। इसका लाभ आगे ज्योतिषियों की जमात को जरूर मिलेगा। पाल बाबा सोशल वेबसाइटों पर छा गये हैं, फेसबुक पर लोग उनसे दोस्ती के लिए झपट रहे हैं। अब स्पेन भले ही खुशी मनाये, फीफा विश्वकप का जुलूस निकाले पर असली जीत तो पाल बाबा के नाम गयी है। जय हो पाल बाबा की। सुना है बाबा संकट में है| कोई बात नहीं, बाबा ने इतिहास रच दिया है| वे रहें न रहें, उनका नाम तो रहेगा ही|

3 टिप्‍पणियां:

  1. बाबा इतिहास रच कर अब आराम फरमा रहे हैं. :)

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  2. अब तक ज्योतिष की वैज्ञानिकता पर ऊंगली उठाने वाले, उसे अवैज्ञानिक और अनुुमान मात्र करार देने वालों को कोई तर्क नहीं सूझ रहा है। वे मनुष्य रूपधारी ज्योतिषियों से पंगा लेने में तनिक नहीं घबराते थे पर एक पशु-ज्योतिर्विज्ञानी के हाथों उन््हें करारी मात मिली है, कड़ी चुनौती मिली है।" बिलकुल सही कहा आपने। धन्यवाद।

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