सोमवार, 19 जुलाई 2010

कुरैशी का दिमाग ख़राब तो नहीं

पाकिस्तान के विदेशमंत्री शाह महमूद कुरेशी न केवल अंतरराष्ट्रीय राजनय की मर्यादाओं का उल्लंघन कर रहे हैं बल्कि हिंदुस्तान का अपमान भी कर रहे हैं। पहले उन्होंने हमारे विदेशमंत्री एस एम कृष्णा के बारे में अनर्गल टिप्पणियां कीं और अब अपनी हैसियत से बढ़कर बातें कर रहे हैं। कृष्णा के साथ बातचीत के बाद उनके निरर्थक प्रलाप को असरहीन करने की कोशिश उनके प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी ने जरूर की लेकिन उसका कोई असर होता, इसके पहले ही एक बार फिर कुरैशी ने जिस तरह की बात कही है, वह भारत के लिए अपमानजनक है। जब एक पाकिस्तानी पत्रकार ने उनसे कृष्णा द्वारा उन्हें दिये गये भारत आने के निमंत्रण के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि वे घूमने-फिरने या आराम फरमाने के लिए दिल्ली नहीं जा रहे। यह घोर आपत्तिजनक बात है। कृष्णा ने उन्हें आगे की बातचीत के लिए दिल्ली आने का न्योता दिया है, न कि यहां आकर आराम फरमाने के लिए।  

क्या वे समझते हैं कि बातचीत के लिए भारत जाना घूमने-फिरने या आराम फरमाने जैसा है? उन्हें हिंदुस्तान आराम फरमाने का न्योता क्यों देगा? वे जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि उन्हें सचमुच आराम की जरूरत है। आराम की ही नहीं इलाज की भी जरूरत है। इस मामले में भी भारत ने कई पाकिस्तानी परिवारों की मदद की है। बेहतर हो कि पहले वे किसी चिकित्सक की सलाह लें और अगर उन्हें लगता है कि इस संदर्भ में भारत की सहायता चाहिए तो उन्हें मिल सकती है। भारत अपनी उदारता बार-बार दिखा चुका है पर पाकिस्तानी नेता अपनी चालबाजी से बाज नहीं आते। कुरैशी साहब का यह कहना कि कृष्णा बिना तैयारी के बातचीत करने पाकिस्तान चले आये थे, निहायत आपत्तिजनक है और इस तरह की बकवास का भारत सरकार को सख्त जवाब देना चाहिए। कुरैशी ने यह जो कुछ किया है, बहुत सोच-समझकर किया है। वे पहले से ही तैयार थे कि बातचीत नाकाम कर देनी है।
 
वे शायद यह समझ रहे हैं कि इस तरह की व्यर्थ की बातें करके वे अपनी जिम्मेदारी से बच निकलेंगे या इससे मुंबई हमले के मामले में पाकिस्तान की तमाम झूठबयानियों को छिपाने का बहाना मिल जायेगा तो वे गलत समझते हैं। पूरी दुनिया देख रही है यह तमाशा। एक तो आतंकवादियों को प्रोत्साहित करो, उनके भारत में घुसने की व्यवस्था करो, उपद्रव कराओ और उल्टे गैर-जिम्मेदारी का ठीकरा भारत के सिर पर ही फोड़ दो। इस नीति को हिंदुस्तान को ठीक से समझना होगा और पाकिस्तान के बातचीत के ऐसे फरेब से बचना होगा। नासमझ और धूर्त पाकिस्तानी राजनेताओं से तब तक बातचीत नहीं की जानी चाहिए, जब तक वे रिश्तों को दुरुस्त कराने के प्रति गंभीरता नहीं दिखाते।

4 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे नहीं लगता है कि यह किसी खराब दिमाग का लक्षण है ... ये तो सीधा सादा गुरुर है कि 'देखो भाई हम तो कुछ भी कर सकते हैं कुछ भी कह सकते हैं, तुम हमारा क्या बिगाड़ लोगे' ... और सच तो यही है कि हम उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते हैं ... अलबत्ता वो जब चाहे अपने उग्रवादियों को भेज कर हमारे नागरिकों को मार सकते हैं ...

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  2. kureshi ka dimag ek dm thik hai dimag to hmare raj netaon ka khrab hai jo baar 2 pta nhi kyon jante boojhte bhi pakistan shrnm gachchhami rhte hai pta nhi kb hmare netaon me rashtriy swabhiman jagega jagega bhi ki nhi inh halton ko dekh kr to lg rha hai nhi jagega
    is ke bad bhi varta ka raag jari hai ab bhi doob mrne ko pta nhi kya rh gya hai
    dr.ved vyathit

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