बुधवार, 7 अप्रैल 2010

कायर और जुआरी


महाभारत के पात्र आज भी कई प्रश्न छोड़ते हैंजिस पात्र को धर्मराज कहा गया है वह इस महाकाव्य का सबसे कमजोर पात्र है। युधिष्ठिर   ने कई बार मर्यादा का उल्लंघन कियाअपने सत्यवादी होने के ढोंग को युद्ध  के मैदान में उजागर कियाजुआ खेलकर अपने राज्य तथा पत्नी तक को भी दांव  पर लगा दियाद्रोपदी आज भी इस धर्मराज को कोस रही है.

मेरे तथाकथित पति को
क्या हक था मुझे  
दांव पर लगाने का

भाइयों के पराक्रम
से अर्जित
राज्य और पत्नी को
इस तरह गंवाने का

लोग भले ही
कहते रहें तुम्हें धर्मराज
जबकि सच्चाई यह है
कि तुम हो स्वाभिमान
 के टूटे साज़

धर्म को तो तुमने
उसी दिन
दफना दिया था
जिस दिन
अपनी अनुजवधू को
अपनी अंकशायिनी
बना लिया था

काश आज द्वापर नहीं
त्रेता होता
कान्हा की जगह
राम होता
तो यह निश्चित था
कि बाली की  भांति
तेरा भी वध हुआ होता

मेरे देश का इतिहास
कितना महान होता
काश तुझ जैसा
कायर और जुआरी
इस माटी   में पैदा ही
हुआ होता






2 टिप्‍पणियां:

  1. Naye tevar hain aapki is kavita men.Bahut saahas bhari abhivyakti hai. Dr.Parihar,aapko bahut badhai.

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  2. क्या पात्रों को आपने समझा था, बिना समझें सिर्फ कविता करने को लिखा था
    बीते ठाले लिखने से क्या देश का भला हो गया, रक्त का उबाल यहीं ठंडा हो गया
    करी इतिहास की बुराई,हो गए कवि राई,पूछता हूँ देश गरिमा तुमने क्यों ना गायी
    काश तुम कलमवीर न हुए होते,काश तुम युद्धवीर होते, तो अर्थ के अनर्थ ना होते

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