रविवार, 25 अप्रैल 2010

यह ताक-झांक आखिर क्यों

दूसरों की जिंदगी में ताक-झांक आम तौर पर आदमी के स्वभाव में शामिल होता है। वह भले ही खुद बहुत साफ-सुथरा न हो, ईमानदार न हो, नैतिक न हो लेकिन दूसरों की शख्सियत में ऐसी ही बातें देखकर उसका मन प्रसन्न हो जाता है। इस तरह उसे अपनी गलतियों, अपनी बुराइयों का औचित्य साबित करने की एक खुशफहमी हासिल हो जाती है। उसे लगने लगता है कि सभी लोग या तो उसके जैसे ही हैं या फिर उससे भी बुरे हैं। यह हीनता की ग्रंथि है। यह बीमारी है। इससे ग्रस्त लोगों की कमी नहीं है। वे अपनी एक दुनिया बना लेते हैं और दूसरों की हीनता का मजाक उड़ाकर खुश रहते हैं। किसी की ऐसी खुशी से दूसरे का नुकसान हो न हो लेकिन समाज में इस तरह के बीमार लोगों के लिए जगह नहीं होनी चाहिए। यह रोग संक्रामक है और ज्यादातर ऐसे लोग जो जिंदगी में नाकाम रहते हैं, अपना वांछित हासिल नहीं कर पाते हैं, इस क्लब में शामिल होते चले जाते हैं।

अब तो हमारी सरकारें भी लोगों की जिंदगियों में अनैतिक ताक-झांक करने लगी हैं। आरोप लग रहे हैं कि केंद्र सरकार कई नेताओं के फोन टेप करा रही थी। नीतीश कुमार, शरद पवार, दिग्विजय सिंह और प्रकाश करात के फोन चोरी-छिपे टेप किये जा रहे थे। नामों की फेहरिश्त देखकर कुछ अजीब लगता है। नीतीश कुमार का लोकप्रियता ग्राफ निरंतर बढ़ रहा है। बिहार के लोग खुश हैं कि बिहार में विकास के काम हो रहे हैं, अपराध कम हुआ है, सीएम सबकी सुनते हैं, हर दम कुछ न कुछ ऐसा करते रहते हैं, जो राज्य के गौरव को बढ़ा सके। कांग्रेस को यह अच्छा कैसे लगेगा। उसे तो नीतीश को टंगड़ी मारने का रास्ता चाहिए। प्रकाश करात सीपीएम के नेता हैं। पश्चिम बंगाल में ममता ने जोर लगा रखा है। उन्हें वामपंथियों को उखाड़ फेंकना है। कांग्रेस ममता से गठजोड़ करके वहां सत्ता में आना चाहती है। इसलिए नीतीश और करात के फोन टेप करना समझ में आता है। शरद पवार हालांकि सरकार में शामिल हैं लेकिन वे कब किस करवट लुढ़क जायें, कब क्या कर दें, पता नहीं चलता, इसलिए सरकार उनकी गतिविधियों पर नजर रखना चाहती होगी, यह बात भी थोड़ी-बहुत समझ में आती है परंतु वह अपने ही नेता दिग्गी बाबू की अंतरंग वार्ताओं में क्या ढूढ रही है, उनके फोन क्यों टेप किये जा रह थे, एक जरूरी सवाल है।

विपक्ष बहुत नाराज है। यह बिल्कुल अनैतिक है, गैरकानूनी है। आप किसी की निजी जिंदगी के बारे में क्या जानना चाहते हैं, क्यों जानना चाहते हैं? जीनव में जो सार्वजनिक है, वह समाज और जनता की सम्यक समालोचना के लिए खुला हुआ है। सरकार के सामने भी खुला है। उसके आगे क्यों जाना चाहती है सरकार? उन सूचनाओं का क्या इस्तेमाल किया जायेगा? ये सारे सवाल विपक्षी नेताओं को मंथ रहे हैं। वे चाहते हैं कि पूरे मसले की उच्चस्तरीय जांच करायी जाय और बताया जाय कि आखिर किसके निर्देश से यह फोनटेपिंग चल रही थी। राजनीतिक मर्यादा के इस सीमोल्लंघन के लिए जो भी जिम्मेदार हो, उसे दंडित किया जाय। लालकृष्ण आडवाणी तो बेतरह लाल-पीले हो रहे हैं। उन्हें संदेह है कि कांग्रेस सरकार आपातकाल जैसे हालात की ओर देश को ले जा रही है। सरकार इस उग्र हमले से डरी हुई है पर बेहतर होगा कि वह तत्काल इस पूरे मामले की सचाई जनता के सामने रखे और अपनी गलती स्वीकार करे। और आश्वस्त भी करे कि भविष्य में ऐसा नहीं होने दिया जायेगा।

1 टिप्पणी:

  1. उम्दा सोच पर आधारित प्रस्तुती के लिए धन्यवाद / ऐसे ही सोच की आज देश को जरूरत है / आप ब्लॉग को एक समानांतर मिडिया के रूप में स्थापित करने में अपनी उम्दा सोच और सार्थकता का प्रयोग हमेशा करते रहेंगे,ऐसी हमारी आशा है / आप निचे दिए पोस्ट के पते पर जाकर, १०० शब्दों में देश हित में अपने विचार कृपा कर जरूर व्यक्त करें /उम्दा विचारों को सम्मानित करने की भी व्यवस्था है /
    http://honestyprojectrealdemocracy.blogspot.com/2010/04/blog-post_16.html

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