शनिवार, 10 अप्रैल 2010

संविधान शिल्पी बाबासाहेब आंबेडकर


दलितों के उत्थान में बाबासाहेब की अग्रणी भूमिका रही। सदियों से दबे कुचले लोगों को मुक्ति का रास्ता दिखाया। अगर आज अम्बेडकरजी होते नो निश्चय ही निराश होते। लेकिन समता और सामाजिक न्याय के अनुयायी उनके जन्म दिवस १४ अप्रेल पर इस महान सपूत को स्मरण कर रहें हैं। मैंने उनके व्यक्तित्व को शब्दों में संजोने का प्रयास किया है।
हे भारत के भाग्य विधाता, संविधान के हे निर्माता
पावन माटी के सपूत को सारा युग झुक शीश नवाता
किया उजागर पाखंडों को
दिया मंत्र मानव मानव है।
नफरत का अनुयाई होकर
आज हुआ मानव दानव है।
तेरी शिक्षाओं  से बाबा, जन जन का मंगल हो जाता
पावन माटी के सपूत को सारा युग झुक शीश नवाता
कहीं घोर अपमान हो रहा
कहीं युद्ध घमासान  हो रहा.
निर्बल के बलराम का भारत
निर्धन का श्मशान हो रहा।
सदियों के अत्याचारों पर जो कसकर लात लगाता
पावन माटी के सपूत को सारा युग झुक शीश नवाता
संविधान के द्वारा तुमने
हर जन को अधिकार दिया है।
दलित शोषितों के सपनों को
तुमने ही साकार किया है।
सामाजिक परिवर्तन करने समता का सूर्य उगाता
पावन माटी के सपूत को सारा युग झुक शीश नवाता
तेरे सपनों के भारत का
आज युवा निर्माण करेंगे।
मिटा विषमता के बरगद को
हर अंकुर का मान रखेंगे।
अंधियारे का चीर के सीना विप्लव के दीप जलाता
पावन माटी के सपूत को सारा युग झुक शीश नवाता

2 टिप्‍पणियां:

  1. भारतीय संविधान के बारे मे भारतीय जनता बहुत कम हि जानती है के भारतीय संविधान लिखा किसने और उसमे क्या क्या है । भारतीय राज्यघटना के शिल्पकार डाँ. बाबासाहेब आंबेडकरने पूरे भारत कि अच्छाई के लिए दिन रात एक कर के संविधान लिखा पर उनके विरोधको ने उनका नाम बदनाम करने कि कोशिश कि और आज भी कर रहे है । आज उन्हिँकी वजहसे अनुसुचित जाती और जमाती के लोग और अनेक पिढिया सुधरने लगी है । आज भारतीय संविधान को लोगो से दूर रखा जाता है यहि कारण है हमारे देश के टुटने का जातिपातिसे और धर्म से ।
    "जय हिँद"
    "जय भीम"

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